सेंटर फार चाइल्ड प्रोटेक्शन, जयपुर द्वारा जिला अलवर मे बाल संरक्षण पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन ।
Date : Friday, June 08, 2018

पुलिस अधीक्षक श्री राहुल प्रकाश ने बताया कि सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ पुलिस, सिक्युरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस के सेंटर फॉर चाइल्ड प्रोटेक्शन जयपुर द्वारा अलवर ,वं दौसा जिले के बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों, मानव तस्करी विरोधी युनिटों में तैनात अधिकारियों एवं सरकारी अभियोजकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 5 जून से 7 जून 2018 तक किया गया है।इस अवसर पर सेंटर फॉर चाइल्ड प्रोटेक्शन के प्रतिनिधि श्री प्रवीण सिंह, डॉ. विजेंदर सिंह ,वं श्री आशुतोष श्रीवास्तव ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उदेश्य विभिन्न प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों, बच्चो के लिए किये गए अलग अलग विधिक प्रावधानों के विषय में जानकारी उपलब्ध करवाना एवं उन्हें बच्चों के प्रति संवेदनशील बनाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम मे बच्चों से सम्बंधित विभिन्न अधिनियमों जैसे कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 तथा पोक्सो एक्ट, 2012, की जानकारी दी गई तथा उपरोक्त अधिनियमों से संबंधित अध्ययन सामाग्री वितरण की गई। प्रशिक्षण के प्रथम दिन, कार्यक्रम प्रबंधक श्री प्रवीण सिंह एवं डॉ. विजेंदर सिंह ने बाल मैत्री पुलिस व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी उपस्थित अधिकारियों को दी। उन्होने बाल कल्याण अधिकारियों को बताया कि बच्चों के साथ में होने वाले शारीरिक,मानसिक अथवा लैंगिक दुर्व्यवहार को रोकने के लिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि बच्चों के साथ-साथ हम सभी को बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए विधिक प्रावधानों तथा विभागों की जानकारी हो।उन्होनें बाल श्रमिकों की तस्करी को रोकने के लिए पुलिस विभाग द्वारा पूर्व में किए गए प्रयासों, बाल मित्र पुलिस व्यवस्था के अर्न्तगत देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा विधि से संघर्षरत बच्चों के साथ किए जाने वाले व्यवहार तथा संरचनाओं में सकारात्मक परिवर्तन के सुझाव अधिकारियों को दिए। प्रशिक्षण के अगले दिन श्री धीरज वर्मा सर्किल इन्सपेक्टर, आर.पी.ए. जयपुर द्वारा किशोर न्याय अधिनियम के तकनीकि पहलूओं तथा व्यवहारिक समस्याओं के बारे में पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी। उन्होने पुलिस अधिकारियों द्वारा पूछे गए प्रशनों के उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासा शान्त की। उन्होनें पुलिस अधिकारियों से अधिनियम के अनुसार बच्चों के बयान सादी वेषभूषा मे लेने तथा थानों पर बाल हेल्प डेस्क विकसित करने के सुझाव दिए। श्री धीरज वर्मा ने बाल संरक्षण से संबंधित प्रमुख कानूनो-जे-जे-एक्ट 2015, पोक्सो एक्ट 2012 ,वं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के आपसी संबंधो को रेखांकित कर प्रतिभागियों को इनकी व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन सभी प्रतिभागियों ने जिले की बाल संरक्षण इकाइयों-बाल गृह, शिशु गृह ,वं संप्रे’क्षण गृह का भ्रमण कर इन भवनों के बाल संरक्षण पदाधिकारियों से बच्चों की स्थितियों के बारे मे जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम सत्र मे अलवर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डा0 श्री मूल सिंह राणा ने प्रतिभागियों को संबोधित कर उनका उत्साहवर्धन किया। डा0 राणा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की और प्रतिभागियों से अपील की कि प्राप्त जानकारी को अपने सहयोगियों से भी साझा करे जिससे समाज मे बाल संरक्षण हेतु व्यापक सुरक्षा कवच स्थापित हो सके।